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विधानसभा में प्रचंड जीत के बाद बजट पर टिकी बिहार की निगाहें, क्या केंद्र देगा बड़ा तोहफा?

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पटना।एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट को लेकर बिहार में सियासी और आर्थिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली रिकॉर्ड जीत के बाद यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या केंद्र सरकार इस बार बिहार के लिए कोई विशेष आर्थिक पहल करेगी। सत्ता पक्ष को जहां बड़े ऐलान की उम्मीद है, वहीं विपक्ष इसे लेकर संशय जता रहा है।

पिछले बजटों में मिली थीं अहम सौगातें

पिछले दो वर्षों के केंद्रीय बजट पर नजर डालें तो बिहार के लिए कई बड़े फैसले लिए गए थे। वर्ष 2025 के बजट में मखाना बोर्ड के गठन, पटना एयरपोर्ट के विस्तार, किसानों के लिए खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी पटना में सीटों की बढ़ोतरी और मिथिलांचल में बाढ़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए थे।
वहीं 2024 के बजट में बिहार को आधारभूत ढांचे के लिए बड़ी राशि मिली थी। सड़क परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए गए, नए एक्सप्रेसवे, गंगा पर पुल, औद्योगिक हब और बाढ़ प्रबंधन योजनाओं को भी बजट का हिस्सा बनाया गया था।

पर्यटन और ऊर्जा पर भी रहा फोकस

पिछले बजटों में केवल सड़क और कृषि ही नहीं, बल्कि पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई। बोधगया में महाबोधि कॉरिडोर, नालंदा-राजगीर पर्यटन विकास, भागलपुर में पावर प्लांट और ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के लिए बड़ी वित्तीय सहायता दी गई थी।

चुनावी जीत के बाद बढ़ी उम्मीदें

विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत मिलने के बाद सत्तारूढ़ दल का मानना है कि केंद्र सरकार बिहार को विकास की रफ्तार और तेज करने के लिए अतिरिक्त सहयोग दे सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा निवेश को लेकर दिए गए संकेतों के बाद उद्योग जगत की नजर भी आगामी बजट पर टिकी हुई है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से बिहार को पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाए हैं, ऐसे में यदि विशेष पैकेज या बड़ा आर्थिक सहयोग मिलता है तो राज्य के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद बिहार केंद्र की प्राथमिकता में बना हुआ है। रोजगार सृजन, औद्योगीकरण और पलायन रोकने के लिए ठोस आर्थिक पहल की जरूरत बताई जा रही है। शिक्षण संस्थानों, आधारभूत संरचना और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

विपक्ष का सवाल: पहले का हिसाब कहां?

वहीं विपक्षी दलों का तर्क है कि चुनाव खत्म होने के बाद अब बिहार के नाम पर बड़े ऐलानों की संभावना कम है। उनका कहना है कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि पिछले बजटों में दी गई राशि का उपयोग किस तरह हुआ। विपक्ष इस बार बजट में किसी “विशेष इनाम” को लेकर ज्यादा आशावान नहीं दिख रहा।

बजट पर टिकी निगाहें

अब सबकी नजर 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर है। सत्ता पक्ष को जहां बिहार के लिए नई घोषणाओं की उम्मीद है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति मान रहा है। वास्तविक तस्वीर बजट आने के बाद ही साफ हो पाएगी कि प्रचंड चुनावी जीत का असर आर्थिक फैसलों में कितना दिखाई देता है।

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